नक्सली Problem in India

भारत में नक्सल समस्या ( Naxal Problme in India )

नक्सली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी – Maoist) के सदस्य है। नक्सल शब्द पश्चिम बंगाल में नक्सलबारी (Naxalbari) गांव के नाम से निकला, जहां आंदोलन की शुरुवात हुवी थी। नक्सलियों को कट्टरपंथी कम्युनिस्ट माना जाता है, जो माओवादी राजनीतिक भावना और विचारधारा का समर्थन करते हैं। उनकी उत्पत्ति को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) 1967 में विभाजित किया, जिससे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का गठन हुआ।.

शुरुवात में आंदोलन केवल West Bengal में था , पर धीरे धीरे कई वर्षो में यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) जैसे भूमिगत समूहों की गतिविधियों के माध्यम से छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे ग्रामीण दक्षिणी और पूर्वी भारत के कम विकसित क्षेत्रों में फैल गया और आतंकवाद का रूप ले लिया!

Source : hindi.oneindia.com
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History of Naxals (नक्सलियों का इतिहास )

नक्सलियों ये शब्द पश्चिम बंगाल के एक छोटे से गांव नक्सलबारी से आता है, जहां चारू मजूमदार, कानू सान्याल और Jangal संथल के नेतृत्व में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी – Marxist) (CPI-M) के एक वर्ग ने 1967 में विद्रोह (Uprising) शुरू किया। 18 पर मई 1967, सिलीगुड़ी किसान सभा के अधक्ष्य  Jangal  ने , कनू सान्याल द्वारा शुरू किए गए आंदोलन के लिए अपना समर्थन घोषित किया, और भूमिहीन भूमि को फिर से वितरित करने के लिए सशस्त्र संघर्ष को अपनाने की उनक तैयारी की घोषणा की !

1971 के आसपास नक्सलियों ने कलकत्ता में छात्र आंदोलन के कट्टरपंथी (Extremist)वर्गों में एक मजबूत उपस्थिति प्राप्त की।  छात्रों ने नक्सलियों में शामिल होने के लिए स्कूल छोड़ दिया। मजूमदार ने अपने संगठन (Organisation) में अधिक छात्रों को लुभाने के लिए घोषित किया कि न केवल ग्रामीण इलाकों में क्रांतिकारी युद्ध होना था, बल्कि अब हर जगह और सहजता से। इस प्रकार मजूमदार ने एक “विनाश रेखा” घोषित की, यह एक सिद्धांत है कि नक्सलियों को व्यक्तिगत “वर्ग दुश्मनों” (जैसे मकान मालिक, व्यवसायी, विश्वविद्यालय के शिक्षक, पुलिस अधिकारी, दाएं और बाएं के राजनेता) और अन्य लोगों की हत्या करनी चाहिए।

ऑपरेशन स्टीपलचेज़ (Operation Steelplechase) : – 

जुलाई 1971 में, इंदिरा गांधी ने भारतीय सेना को नक्सलियों के खिलाफ संगठित करने के लिए West Bengal में लगे राष्ट्रपति शासन (President Rule) का लाभ उठाया और एक विशाल संयुक्त सेना और पुलिस काउंटर विद्रोह अभियान शुरू किया, जिसे “ऑपरेशन स्टीपलचेज़” कहा जाता है. जिसमें सैकड़ों नक्सलियों को मारा गया और 20,000 से अधिक संदिग्धों और कैडरों को कैद कर लिया गया उनके वरिष्ठ नेताओं सहित।

अर्धसैनिक बलों और पैरा कमांडो के एक ब्रिगेड ने ऑपरेशन स्टीपलचेज़ में भी भाग लिया। ऑपरेशन को  अक्टूबर 1969 में कोरियोग्राफ किया गया था, और लेफ्टिनेंट जनरल ( Lt.General of Army ) J.F.R जैकब को भारत के गृह सचिव गोविंद नारायण ने आज्ञा दी थी कि “कोई प्रचार नहीं होना चाहिए और कोई रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए” .

                                                                 Naxal – Maoist Insurgency

                       India                                Naxalites   
                           CRPF Jawans  

                          CPI (Maoist)

CPI (Maoist)
PLGA
CPI (M-L) Janashakti
CPI (M-L) Naxalbari (until 2014)
CPUSI
CPI (M-L) ND
CPI (M-L) (Mahadev Mukherjee)
CPI (M-L) People’s

    Pranay Shahay (Chief of CRPF)

Ganpathy (General Secretary)

    Total Strength: 80,000 (CRPF Soldiers) Total Strength: 10,000 – 30,000
Total Losses & Casualities : 2500-3500 (Since-1970) Total Losses & Casualities:3,500-4,200 (Since-1970)

 

आज भी भारत के जिले नक्सल प्रभावित है जैसे  :- 

Andhra Pradesh: Visakhapatnam
Bihar: Aurangabad, Gaya, Jamui, Lakhisarai
Chhattisgarh: Bastar, Bijapur, Dantewada, Kanker, Kondagaon, Narayanpur, Rajnandgaon, Sukma
Jharkhand: Bokaro, Chatra, Garhwa, Giridih, Gumla, Hazaribagh, Khunti, Latehar, Lohardaga, Palamu, Ranchi, Simdega West, Singhbhum
Maharashtra: Gadchiroli
Odisha: Koraput, Malkangiri
Telangana: Bhadradri, Kothagudem

Source : www.wikipedia.com

 

नक्सलि लड़ाई में  Guerrilla Warfare तकनीक का इस्तेमाल करते है और इसमें उन्हें महारत हासिल है !. ये  Guerrilla Warfare का मतलब है छुप कर हमला करना इसके लिए  ये नक्सल कई घंटो तक बैठ कर अपने दुश्मन ( Enemy ) का इंतज़ार करते है और फिर अचानक से उस पर हमला करके अपने दुश्मन को अच्मभित कर देते है  ! 

जैसे आपको याद होगा : – 6th April 2010 में 1000 नक्सलियों ने Guerrilla Warfare तकनीक से हमारे CRPF के पेट्रोलिंग  टीम के 2 Trucks को  Land Mines बिछा कर बम उड़ा दिया और फिर Rifles , बंदूकों से  छुप कर जबरदस्त हमला किया जिसमे हमारे 76 CRPF के जवान शहीद हो गए थे !

नक्सलियों के पास हथियार कौन से और कहाँ से आते है : –

इनके पास बन्दुक ,AK-47 , Grenade ,Detonatoers, Improvised rocket launchers जैसे खतरनाक हथियार होते है  ! विदेशी समर्थन के बिना एक विद्रोह नहीं बचा सकता है। नक्सलियों के वित्त में विदेशी धन बड़ा हिस्सा निभाता है . ऐसा कहा जाता है Pakistan and China से नक्सलीयो को Funding होती है !. लोकल व्यापारी (Businessmen) को भी डरा धमका कर नक्सलियों को अच्छा पैसा उनसे मिल जाता है !

ऑपरेशन ग्रीन हंट (Operation Green-hunt)  : – 

ऑपरेशन ग्रीन हंट ऑपरेशन नवंबर 2009 में “लाल गलियारे (Red Corridor)” के पांच राज्यों के साथ शुरू हुआ था। इस शब्द को छत्तीसगढ़ पुलिस अधिकारियों ने राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के खिलाफ एक सफल अभियान का वर्णन करने के लिए तैयार किया था।. बड़े पैमाने पर विरोधी नक्सली परिचालनों का वर्णन करने के लिए मीडिया द्वारा गलत तरीके से उपयोग किया गया था. भारत सरकार अपने विरोधी नक्सली हमले का वर्णन करने के लिए “ऑपरेशन ग्रीन हंट” शब्द का उपयोग नहीं करती है !.

ऑपरेशन ग्रीन हंट में अब तक 1500 से अधिक लोग अपनी जान गवा चुके है और ये अभी तक चल रहा है ! पर Operation Green-hunt में Indian Amry का इस्तेमाल अभी तक नहीं हुवा है न शायद आगे कभी होगा , और इसके पीछे बुद्धिजीवी लोगो का तर्क ये है की अपनों के खिलाफ Army का  इस्तेमाल हमें नहीं करना चाहिए ! 

 

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